महाभारत 7.134.10
ततः प्रववृते युद्धं कर्णस्य सह पाण्डवैःसंरब्धस्य महाराज सिंहनादविनादितम्
tataḥ pravavṛte yuddhaṃ karṇasya saha pāṇḍavaiḥsaṃrabdhasya mahārāja siṃhanādavināditam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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