महाभारत 7.134.21
शरवर्षं तु तत्कर्णः पार्थिवैः समुदीरितम्शरवर्षेण महता समन्ताद्व्यकिरत्प्रभो
śaravarṣaṃ tu tatkarṇaḥ pārthivaiḥ samudīritamśaravarṣeṇa mahatā samantādvyakiratprabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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