महाभारत 7.134.23
तत्राद्भुतमपश्याम सूतपुत्रस्य लाघवम्यदेनं समरे यत्ता नाप्नुवन्त परे युधि
tatrādbhutamapaśyāma sūtaputrasya lāghavamyadenaṃ samare yattā nāpnuvanta pare yudhi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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