महाभारत 7.134.55
अद्य मे युध्यमानस्य सह गाण्डीवधन्वनाद्रक्ष्यन्ति विक्रमं पार्थाः कालस्येव युगक्षये
adya me yudhyamānasya saha gāṇḍīvadhanvanādrakṣyanti vikramaṃ pārthāḥ kālasyeva yugakṣaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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