महाभारत 7.134.60
इत्युक्त्वा प्रययौ राजा सैन्येन महता वृतःफल्गुनं प्रति दुर्धर्षः क्रोधसंरक्तलोचनः
ityuktvā prayayau rājā sainyena mahatā vṛtaḥphalgunaṃ prati durdharṣaḥ krodhasaṃraktalocanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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