महाभारत 7.136.15
तथैव तव पुत्रस्य रथोदाराः प्रहारिणःमहत्या सेनया सार्धं जग्मुर्द्रोणरथं प्रति
tathaiva tava putrasya rathodārāḥ prahāriṇaḥmahatyā senayā sārdhaṃ jagmurdroṇarathaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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