महाभारत 7.136.17
द्रोणेन वार्यमाणास्ते स्वयं तव सुतेन चन शक्यन्ते महाराज योधा वारयितुं तदा
droṇena vāryamāṇāste svayaṃ tava sutena cana śakyante mahārāja yodhā vārayituṃ tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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