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महाभारत 7.136.8
क्षिप्तैः कनकचित्रैश्च नृपच्छत्रैः क्षितिर्बभौद्यौरिवादित्यचन्द्राद्यैर्ग्रहैः कीर्णा युगक्षये
kṣiptaiḥ kanakacitraiśca nṛpacchatraiḥ kṣitirbabhaudyaurivādityacandrādyairgrahaiḥ kīrṇā yugakṣaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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