महाभारत 7.139.10
किममन्यन्त सैन्यानि प्रविष्टे शत्रुतापनेदुर्योधनश्च किं कृत्यं प्राप्तकालममन्यत
kimamanyanta sainyāni praviṣṭe śatrutāpaneduryodhanaśca kiṃ kṛtyaṃ prāptakālamamanyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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