महाभारत 7.139.13
यत्प्राविशन्महेष्वासः पाञ्चालानपराजितःनृत्यन्निव नरव्याघ्रो रथमार्गेषु वीर्यवान्
yatprāviśanmaheṣvāsaḥ pāñcālānaparājitaḥnṛtyanniva naravyāghro rathamārgeṣu vīryavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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