महाभारत 7.14.28
अथाप्लुत्य पदान्यष्टौ संनिपत्य गजाविवसहसा लोहदण्डाभ्यामन्योन्यमभिजघ्नतुः
athāplutya padānyaṣṭau saṃnipatya gajāvivasahasā lohadaṇḍābhyāmanyonyamabhijaghnatuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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