महाभारत 7.14.33क्षीबवद्विह्वलो वीरो निमेषात्पुनरुत्थितःभीमोऽपि सुमहाबाहुर्गदापाणिरदृश्यतkṣībavadvihvalo vīro nimeṣātpunarutthitaḥbhīmo'pi sumahābāhurgadāpāṇiradṛśyataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें