महाभारत 7.141.16
इत्युक्त्वा रोषताम्राक्षो राक्षसः परवीरहाद्रौणिमभ्यद्रवत्क्रुद्धो गजेन्द्रमिव केसरी
ityuktvā roṣatāmrākṣo rākṣasaḥ paravīrahādrauṇimabhyadravatkruddho gajendramiva kesarī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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