महाभारत 7.141.21
ततः क्रोधसमाविष्टो भैमसेनिः प्रतापवान्शरैरवचकर्तोग्रैर्द्रौणिं वज्राशनिस्वनैः
tataḥ krodhasamāviṣṭo bhaimaseniḥ pratāpavānśarairavacakartograirdrauṇiṃ vajrāśanisvanaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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