महाभारत 7.141.39
पूजितस्तव पुत्रैश्च सर्वयोधैश्च भारतवपुषा प्रतिजज्वाल मध्याह्न इव भास्करः
pūjitastava putraiśca sarvayodhaiśca bhāratavapuṣā pratijajvāla madhyāhna iva bhāskaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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