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महाभारत 7.142.34
तौ तु प्रत्युद्ययौ राजन्राक्षसेन्द्रो ह्यलम्बुसःअष्टचक्रसमायुक्तमास्थाय प्रवरं रथम्
tau tu pratyudyayau rājanrākṣasendro hyalambusaḥaṣṭacakrasamāyuktamāsthāya pravaraṃ ratham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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