महाभारत 7.143.10
अवप्लुत्य रथात्तस्माच्चित्रसेनो महारथःनाकुलिं पञ्चविंशत्या शराणामार्दयद्बली
avaplutya rathāttasmāccitraseno mahārathaḥnākuliṃ pañcaviṃśatyā śarāṇāmārdayadbalī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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