महाभारत 7.143.13
द्रुपदं तु सहानीकं द्रोणप्रेप्सुं महारथम्वृषसेनोऽभ्ययात्तूर्णं किरञ्शरशतैस्तदा
drupadaṃ tu sahānīkaṃ droṇaprepsuṃ mahārathamvṛṣaseno'bhyayāttūrṇaṃ kirañśaraśataistadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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