महाभारत 7.144.30
द्रवतां सादिनां चैव गजानां च विशां पतेअन्योन्यमभितो राजन्क्रूरमायोधनं बभौ
dravatāṃ sādināṃ caiva gajānāṃ ca viśāṃ pateanyonyamabhito rājankrūramāyodhanaṃ babhau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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