महाभारत 7.144.6
स्यालस्तु तव संक्रुद्धो माद्रीपुत्रं हसन्निवकर्णिनैकेन विव्याध हृदये निशितेन ह
syālastu tava saṃkruddho mādrīputraṃ hasannivakarṇinaikena vivyādha hṛdaye niśitena ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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