महाभारत 7.145.23
तच्छिरो न्यपतद्भूमौ संदष्टौष्ठपुटं रणेमहावातसमुद्धूतं पक्वं तालफलं यथा
tacchiro nyapatadbhūmau saṃdaṣṭauṣṭhapuṭaṃ raṇemahāvātasamuddhūtaṃ pakvaṃ tālaphalaṃ yathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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