महाभारत 7.145.41
पीड्यमानस्तु कर्णेन युयुधानो महारथःविव्याध बहुभिः कर्णं त्वरमाणः पुनः पुनः
pīḍyamānastu karṇena yuyudhāno mahārathaḥvivyādha bahubhiḥ karṇaṃ tvaramāṇaḥ punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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