महाभारत 7.145.48
एषा विदीर्यते राजन्बहुधा भारती चमूःविप्रकीर्णान्यनीकानि नावतिष्ठन्ति कर्हिचित्
eṣā vidīryate rājanbahudhā bhāratī camūḥviprakīrṇānyanīkāni nāvatiṣṭhanti karhicit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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