महाभारत 7.145.67
अभ्ययात्त्वरितं युद्धे किरञ्शरशतान्बहून्तथैव पाण्डवाः सर्वे सात्यकिं पर्यवारयन्
abhyayāttvaritaṃ yuddhe kirañśaraśatānbahūntathaiva pāṇḍavāḥ sarve sātyakiṃ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें