महाभारत 7.146.43
तन्निधाय धनुर्नीडे द्रोणः क्षत्रियमर्दनःआददेऽन्यद्धनुः शूरो वेगवत्सारवत्तरम्
tannidhāya dhanurnīḍe droṇaḥ kṣatriyamardanaḥādade'nyaddhanuḥ śūro vegavatsāravattaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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