महाभारत 7.147.24
एतयोः शरवर्षेण प्रभग्ना नो महारथाःवार्यमाणापि कौन्तेय पृतना नावतिष्ठते
etayoḥ śaravarṣeṇa prabhagnā no mahārathāḥvāryamāṇāpi kaunteya pṛtanā nāvatiṣṭhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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