महाभारत 7.147.7
यदि नाहं परित्याज्यो भवद्भ्यां पुरुषर्षभौयुध्येतामनुरूपेण विक्रमेण सुविक्रमौ
yadi nāhaṃ parityājyo bhavadbhyāṃ puruṣarṣabhauyudhyetāmanurūpeṇa vikrameṇa suvikramau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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