महाभारत 7.148.14
नाज्ञासिषुर्धावमाना बहवश्च महारथाःसंछिन्नान्यात्मगात्राणि वाहनानि च संयुगे
nājñāsiṣurdhāvamānā bahavaśca mahārathāḥsaṃchinnānyātmagātrāṇi vāhanāni ca saṃyuge
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें