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महाभारत 7.148.31
वासुदेव उवाच · vāsudeva uvāca
पश्यामि कर्णं कौन्तेय देवराजमिवाहवेविचरन्तं नरव्याघ्रमतिमानुषविक्रमम्
paśyāmi karṇaṃ kaunteya devarājamivāhavevicarantaṃ naravyāghramatimānuṣavikramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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