महाभारत 7.148.54
घटोत्कच भवांश्चैव दीर्घबाहुश्च सात्यकिःमतौ मे सर्वसैन्येषु भीमसेनश्च पाण्डवः
ghaṭotkaca bhavāṃścaiva dīrghabāhuśca sātyakiḥmatau me sarvasainyeṣu bhīmasenaśca pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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