महाभारत 7.148.8
कर्णस्यापि रथे वाहानन्यान्सूतो न्ययोजयत्शङ्खवर्णान्महावेगान्सैन्धवान्साधुवाहिनः
karṇasyāpi rathe vāhānanyānsūto nyayojayatśaṅkhavarṇānmahāvegānsaindhavānsādhuvāhinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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