महाभारत 7.149.2
अब्रवीत्तव पुत्रस्तु दुःशासनमिदं वचःएतद्रक्षो रणे तूर्णं दृष्ट्वा कर्णस्य विक्रमम्
abravīttava putrastu duḥśāsanamidaṃ vacaḥetadrakṣo raṇe tūrṇaṃ dṛṣṭvā karṇasya vikramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें