महाभारत 7.149.30
ततो घटोत्कचो राजन्नलंबलवधेप्सयाउत्पपात भृशं क्रुद्धः श्येनवन्निपपात ह
tato ghaṭotkaco rājannalaṃbalavadhepsayāutpapāta bhṛśaṃ kruddhaḥ śyenavannipapāta ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें