महाभारत 7.149.32
ततो घटोत्कचः खड्गमुद्गृह्याद्भुतदर्शनम्चकर्त कायाद्धि शिरो भीमं विकृतदर्शनम्
tato ghaṭotkacaḥ khaḍgamudgṛhyādbhutadarśanamcakarta kāyāddhi śiro bhīmaṃ vikṛtadarśanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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