महाभारत 7.149.3
अभियाति द्रुतं कर्णं तद्वारय महारथम्वृतः सैन्येन महता याहि यत्र महाबलः
abhiyāti drutaṃ karṇaṃ tadvāraya mahārathamvṛtaḥ sainyena mahatā yāhi yatra mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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