महाभारत 7.15.43
तां शरौघमहाफेनां प्रासमत्स्यसमाकुलाम्नदीमुत्तीर्य वेगेन कुरून्विद्राव्य पाण्डवः
tāṃ śaraughamahāphenāṃ prāsamatsyasamākulāmnadīmuttīrya vegena kurūnvidrāvya pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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