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महाभारत 7.15.44
ततः किरीटी सहसा द्रोणानीकमुपाद्रवत्छादयन्निषुजालेन महता मोहयन्निव
tataḥ kirīṭī sahasā droṇānīkamupādravatchādayanniṣujālena mahatā mohayanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंततः किरीटी सहसा द्रोणानीकमुपाद्रवत्छादयन्निषुजालेन महता मोहयन्निव
tataḥ kirīṭī sahasā droṇānīkamupādravatchādayanniṣujālena mahatā mohayanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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