महाभारत 7.15.51
एवं स्वशिबिरं प्रायाज्जित्वा शत्रून्धनंजयःपृष्ठतः सर्वसैन्यानां मुदितो वै सकेशवः
evaṃ svaśibiraṃ prāyājjitvā śatrūndhanaṃjayaḥpṛṣṭhataḥ sarvasainyānāṃ mudito vai sakeśavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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