महाभारत 7.150.39
मायायां तु प्रहीणायाममर्षात्स घटोत्कचःविससर्ज शरान्घोरान्सूतपुत्रं त आविशन्
māyāyāṃ tu prahīṇāyāmamarṣātsa ghaṭotkacaḥvisasarja śarānghorānsūtaputraṃ ta āviśan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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