महाभारत 7.150.40
ततस्ते रुधिराभ्यक्ता भित्त्वा कर्णं महाहवेविविशुर्धरणीं बाणाः संक्रुद्धा इव पन्नगाः
tataste rudhirābhyaktā bhittvā karṇaṃ mahāhaveviviśurdharaṇīṃ bāṇāḥ saṃkruddhā iva pannagāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें