महाभारत 7.150.54सोऽयोधयत्तदा कर्णं मायया लाघवेन चअलक्ष्यमाणोऽथ दिवि शरजालेषु संपतन्so'yodhayattadā karṇaṃ māyayā lāghavena caalakṣyamāṇo'tha divi śarajāleṣu saṃpatanइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें