महाभारत 7.150.71
अथ संधाय वायव्यमस्त्रमस्त्रविदां वरःव्यधमत्कालमेघं तं कर्णो वैकर्तनो वृषा
atha saṃdhāya vāyavyamastramastravidāṃ varaḥvyadhamatkālameghaṃ taṃ karṇo vaikartano vṛṣā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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