महाभारत 7.150.79
अथान्यद्धनुरादाय दृढं भारसहं महत्व्यकर्षत बलात्कर्ण इन्द्रायुधमिवोच्छ्रितम्
athānyaddhanurādāya dṛḍhaṃ bhārasahaṃ mahatvyakarṣata balātkarṇa indrāyudhamivocchritam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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