महाभारत 7.150.82
विधम्य राक्षसान्बाणैः साश्वसूतगजान्विभुःददाह भगवान्वह्निर्भूतानीव युगक्षये
vidhamya rākṣasānbāṇaiḥ sāśvasūtagajānvibhuḥdadāha bhagavānvahnirbhūtānīva yugakṣaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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