महाभारत 7.153.16
स समास्थाय मायां तु ववर्ष रुधिरं बहुविद्युद्विभ्राजितं चासीत्तिमिराभ्राकुलं नभः
sa samāsthāya māyāṃ tu vavarṣa rudhiraṃ bahuvidyudvibhrājitaṃ cāsīttimirābhrākulaṃ nabhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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