महाभारत 7.153.17ततो वज्रनिपाताश्च साशनिस्तनयित्नवःमहांश्चटचटाशब्दस्तत्रासीद्धि महाहवेtato vajranipātāśca sāśanistanayitnavaḥmahāṃścaṭacaṭāśabdastatrāsīddhi mahāhaveइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें