महाभारत 7.153.32
सोऽपहृत्य शिरस्तस्य कुण्डलाभ्यां विभूषितम्तदा सुतुमुलं नादं ननाद सुमहाबलः
so'pahṛtya śirastasya kuṇḍalābhyāṃ vibhūṣitamtadā sutumulaṃ nādaṃ nanāda sumahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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