महाभारत 7.153.34ततो भेरीसहस्राणि शङ्खानामयुतानि चअवादयन्पाण्डवेयास्तस्मिन्रक्षसि पातितेtato bherīsahasrāṇi śaṅkhānāmayutāni caavādayanpāṇḍaveyāstasminrakṣasi pātiteइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें