महाभारत 7.155.9
यद्येतन्न रहस्यं ते वक्तुमर्हस्यरिंदमधैर्यस्य वैकृतं ब्रूहि त्वमद्य मधुसूदन
yadyetanna rahasyaṃ te vaktumarhasyariṃdamadhairyasya vaikṛtaṃ brūhi tvamadya madhusūdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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