महाभारत 7.156.5सूतपुत्रो जरासंधश्चेदिराजो निषादजःसुयोधनं समाश्रित्य तपेरन्पृथिवीमिमाम्sūtaputro jarāsaṃdhaścedirājo niṣādajaḥsuyodhanaṃ samāśritya taperanpṛthivīmimāmइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें